अयोध्या विवाद और सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई

अयोध्या विवाद और सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई

क्या हैं खबर?

सर्वोच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने कहा है कि अयोध्या विवाद की सुनवाई 2 अगस्त से दोबारा की जाएगी।

क्या है अयोध्या विवाद?

  • अयोध्या को राम जन्म भूमि के रूप में जाना जाता है। इसी भूमि के पास बाबरी मस्जिद भी है इसी भूमि पर विवाद 1949 से अभी तक चल रहा है।
  • विवाद ने रफ्तार 1992 में पकड़ी जब 1992 में हिंदुत्वादी संगठन ने 16 वीं शताब्दी की बाबरी मस्जिद के ढाँचे को गिरा दिया था।
  • बाबरी मस्जिद के ढाँचे के पतन के बाद राष्ट्रपति ने यह मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय के पास स्थानान्तरित कर दिया था।
  • सर्वोच्च न्यायालय को यह निर्धारित करना है कि विवादास्पद जगह पर राम मंदिर स्थित था या बाबरी मस्जिद कही मंदिर के स्थान पर तो मस्जिद नहीं बनवाई गई।
  • 2010 में इलाहाबाद हाइकोर्ट ने इस विवादास्पद स्थान पर फैसला दिया था और विवादास्पद स्थान को तीन भागों में विभाजित किया था जिसमें एक
    भाग राम लाला को को एक भाग निर्मोही अखाड़े को तथा एक भाग सुन्नी वक्फ बोर्ड दिया गया था।

क्या है अध्यक्षता समिति?

  • सुप्रीम कोर्ट ने 5 मार्च, 2019 को दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 89 का उपयोग कर एक मध्यस्थता समिति की स्थापना की थी।
  • सुप्रीम कोर्ट की पाँच न्यायाधीशों की पीठ ने तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति का निर्माण किया था।
  • इस मध्यस्थता समिति के अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एफ.एम.आई. कलीफुल्ला हैं।
  • एफ.एम.आई. कलीफुल्ला के अलावा इसके दो और सदस्य है जिसमें अध्यात्म गुरु श्री श्री रविशंकर प्रसाद तथा वरिष्ठ वकील श्री राम पाँचु शामिल हैं।
  • मध्यस्थता समिति की मीटिंग गोपनीय है तथा विवाद की प्रगति के बारे में मीडिया की पहुँच इस समिति तक नहीं है।
  • हिन्दू संगठनों ने इस मध्यस्थता का विरोध किया है जबकि निर्मोही अखाड़े तथा मुस्लिम निकायों ने इसका स्वागत किया है।

क्या है मध्यस्थता समिति की प्रगति?

  • मध्यस्थता समिति ने अपनी प्रगति के बारे में तो नहीं बताया है लेकिन मध्यस्थता के सकारात्मक परिणाम आने के संकेत दिए हैं।
  • गोपाल सिंह विशारद ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका लगाई थी और सर्वोच्च न्यायालय से मध्यस्थता करने को कहा था गोपाल सिंह विशारद का कहना था कि मध्यस्थ समिति में कई प्रगति नहीं हो रही है।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने मध्यस्थ समिति को 1 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है जिसमें समिति को 31 जुलाई, 2019 तक के कार्य को सम्मिलित करना होगा।

निष्कर्ष – यह विवाद आम जनों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है जो कि संवेदनशील कहा जा सकता है इसीलिए इलाहाबाद हाइकोर्ट ने भी भूमि को तीन हिस्सों में बाँटा था ताकि किसी भी भावनाएँ आहत् न हो धार्मिक भावनाएँ तर्क से परे होती हैं जिन्हें तर्क एवं साक्ष्यों के साथ तौल पाना अत्यन्त मुश्किल है। अत: सर्वोच्च न्यायालय को भी फैसला सोच समझकर देना होगा।

No Comments

Give a comment

In light of Pandameic COVID-19, we are offering ONLINE CLASSES for students from 20TH of MARCH onwards. DOWNLOAD NOW
+