विश्व दृष्टि रिपोर्ट ( World report on vision ) 2019

विश्व दृष्टि रिपोर्ट ( World report on vision ) 2019

चर्चा में क्यों ?

  • हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा प्रथम विश्व दृष्टि रिपोर्ट ( worldreportonvision ) 2019 जारी की गई है।
  • यूएन स्वास्थ्य एजेंसी  ने अपनी रिपोर्ट में ऐसे तथ्य साझा किए हैं, जो दर्शाते हैं कि आंखों की समस्याएं जीवनशैली में आए बदलावों से भी बढ़ रही हैं। इनमें विशेष तौर पर टीवी, मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से होने वाली समस्याएं भी शामिल हैं।

विश्व दृष्टि रिपोर्ट 2019 –

यह नेत्रों से जुड़ी समस्याओं पर अब तक की पहली रिपोर्ट है।

इस रिपोर्ट के अनुसार

  • 1 अरब से ज्यादा लोग ऐसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जिनका इलाज संभव है। इनमें से 6.5 करोड़ लोग नेत्रहीन हैं या मंद दृष्टि से पीड़ित हैं जबकि मोतियाबिंद के ऑपरेशन के जरिए उनका बहुत जल्द इलाज किया जा सकता है। 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोज़मर्रा के काम करने में भी संघर्ष करना पड़ता है क्योंकि उनके पास नज़र का चश्मा नहीं है।
  • कमज़ोर नज़र से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ने का एक बड़ा कारण यह है कि बच्चे अब ज्यादा समय घर से बाहर नहीं बिताते हैं, जिसके कारण आंखों के लेंस को आराम ही नहीं मिल पाता। बच्चों के अलावा महिलाओं,प्रवासी, आदिवासी, ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे समुदायों और विकलागों में यह समस्या व्याप्त है।
  • दृष्टिबाधिता का बोझ निम्न और मध्य आय वाले देशों में ज्यादा दिखाई देता है। निम्न आय वाले क्षेत्रों (पश्चिमी और पूर्वी सब-सहारा अफ़्रीका और दक्षिण एशिया ) में ऐसी समस्याओं की रोकथाम विशेष रूप से अहम है क्योंकि यहां नेत्रहीनता की दर उच्च आय वाले देशों की तुलना में औसतन 8 गुना ज़्यादा है।

भविष्य में समाधान  –

  • नेत्रों से जुड़ी समस्या का समाधान सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी होगा कि देशों की राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं में इलाज को ज़रूरी हिस्से के रूप में शामिल किया जाए और उसे सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य से जोड़ा जाए।
  • आम तौर पर दृष्टिबाधिता और नेत्रहीनता का कारण बनने वाली नेत्र समस्याएं – मोतियाबिंद, ट्रेकोमा – राष्ट्रीय रोकथाम रणनीतियों का हिस्सा हैं, लेकिन अन्य विकारों के प्रति लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए।
  • आंखों की जिन समस्याओं का इलाज शुरुआती चरणों में किया जा सकता है उनमें मधुमेह (डायबिटीज़) के कारण होने वाले नेत्र विकार, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा प्रमुख हैं।
  • ट्रेकोमा सहित अन्य आम नेत्र समस्याओं से निपटने में 8 देशों को हाल के दिनों में सफलता मिली है और यूएन स्वास्थ्य एजेंसी ने इसका स्वागत किया है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत की स्तिथि –

  • भारत में अन्‍धत्‍व के मामलों की संख्‍या में काफी कमी आई है।
  • भारत में दृष्टिहीनता नियंत्रण के लिये चलाए गए राष्ट्रीय कार्यक्रम (National Programme for Control of Blindness-NPCB) की इस रिपोर्ट में सराहना की गई है।
  • रिपोर्ट के अनुसार, NPCB के तहत वर्ष 2016-2017 में, भारत में मोतियाबिंद से पीड़ित कुल 6.5 मिलियन लोगों की सर्जरी की गई। साथ ही कहा गया कि वर्ष 2016-2017 के दौरान लगभग 32 मिलियन बच्चों की स्कूल में जाँच की गई और लगभग 7,50,000 चश्मे वितरित किये गए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) –

  • यह संयुक्त राष्ट्र संघ की ही विशेष संस्था है,जिसकी स्थापना 7 अप्रैल 1948 को हुई थी।
  • इसका उद्देश्य विश्व के लोगों के स्वास्थ्य का स्तर ऊँचा करना और विभिन्न देशों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग एवं मानक विकसित करना है।
  • WHO का मुख्यालय स्विटजरलैंड के जेनेवा शहर में स्थित है।  
  • WHO के नए महानिदेशक डॉक्टर टैड्रोस ऐडरेनॉम ग़ैबरेयेसस है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के 193 सदस्य देश तथा दो संबद्ध सदस्य देश है।
  • भारत भी विश्व स्वास्थ्‍य संगठन का एक सदस्य देश है और इसका भारतीय मुख्यालय राजधानी दिल्ली में स्थित है।

Comments ( 2 )

  • Sandeep thalor

    Good

  • Jitu

    Good

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