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कलह की इस धरा से ऊपर नभ का अनन्त विस्तार हूँ मैं जो गीत सृजन का गाते हैं उस...

“अकल्पनीय सा आकार हूँ मैं”

कलह की इस धरा से ऊपर नभ का अनन्त विस्तार हूँ मैं जो गीत सृजन का गाते हैं उस...

बगावत खुद से जीत के लिए करनी पड़ेगी। इमारत की बुलंदी के लिए नींव भरनी पड़ेगी। पथरीले इन रास्तों...

“तकदीर के भरोसे मैं कुछ भी छोड़ता नहीं”

बगावत खुद से जीत के लिए करनी पड़ेगी। इमारत की बुलंदी के लिए नींव भरनी पड़ेगी। पथरीले इन रास्तों...