शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार : 2019

शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार : 2019

चर्चा में क्यों ?

  • 11 अक्टूबर को 2019 का शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्‍कार अबीय अहमद को दिये जाने की घोषणा हुई।
  • इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबीय अहमद को इरीट्रिया के साथ संबंध सुधारने के उनके शांति प्रयासों के लिए यह पुरस्कार दिया जाएगा।

शांति के नोबेल के बारे में –

  • शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1901 में हुई थी।
  • यह पुरस्कार विश्व स्तर पर शांति के लिए किये गए प्रयासों हेतु वार्षिक रूप से दिया जाता है। विजेताओं का चयन नोर्वेजियन नोबेल समिति (Norwegian Nobel Committee) करती है।
  • शांति के क्षेत्र में पहला पुरस्कार हेनरी डुनांट (Henry Dunant) और फ्रेडेरिक पास्सी (Frederic Passy) को संयुक्त रूप से वर्ष 1901 में  मिला था। हेनरी डुनांट को यह पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस मूवमेंट की स्थापना और जेनेवा कन्वेंशन की शुरुआत करने में उनकी भूमिका के लिए मिला था।
  • शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाली सबसे कम उम्र की (युवा) विजेता पाकिस्तान की मलाला युसुफजई (17 वर्ष) है, उन्हें यह पुरस्कार साल 2014 में बच्चों और युवाओं के शोषण/दमन के खिलाफ संघर्ष और सभी बच्चों के लिए शिक्षा के अधिकार के लिए दिया गया था।
  • शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले सबसे उम्रदराज विजेता ब्रिटेन के जोसेफ रोटब्लाट (87 वर्ष) है, उन्हें यह पुरस्कार साल 1995 में अंतरराष्ट्रीय मामलों में परमाणु हथियारों का उपयोग किए जाने वाले हिस्से को कम करने के प्रयासों और इस तरह के हथियारों को लंबे समय में खत्म करने के लिए दिया गया था।
  • वर्ष 2018 के लिए यह पुरस्कार कांगो के डेनिस मुकाबे (Denis Mukwege) और इराक की नादिया मुराद (Nadia Murad) को यौन हिंसा को युद्ध और सशस्त्र संघर्ष में  हथियार के रूप में इस्तेमाल होने के खिलाफ प्रयास के लिए संयुक्त रूप से दिया गया था।
  • वर्ष 2019 का शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कांर अबीय अहमद को पड़ोसी देश इरिट्रिया के साथ दो दशक से भी अधिक समय से चले आ रहे संघर्ष को ख़त्म करने के लिए दिया गया है।
  • अब तक दो भारतीयों को शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला है-
    • वर्ष 1979 में मदर टेरेसा को लगभग 5 दशकों तक गरीब , असहाय और मरीजों को ‘गरीबी और संकट से उबारने के उनके संघर्षपूर्ण कार्य के लिए’ यह पुरस्कार दिया गया था।
    • वर्ष 2014 में कैलाश सत्यार्थी को ‘बच्चों और युवाओं के दमन के खिलाफ संघर्ष और सभी बच्चों के शिक्षा के अधिकार के लिए जागरूकता फैलाने हेतु’  यह पुरस्कार दिया गया था।  

Comments ( 5 )

  • Dinesh

    💐💐👌👌

  • Anonymous

    🙏💐💐

  • Lalita

    Bahut hi achchha prayas h.kon kahta h kalyug me bhagvan nahi. Ap jese guru ke rup me vo hamare help kar raha h

  • Mahendra Kumar

    👌👌👌👌

  • Mukesh solanki

    Tys uthkursh pariwar 🙏🙏🙏🙏👌

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